
देहरादून। नैनीताल हाईकोर्ट ने साल 2024 में खानपुर में हुई डोईवाला के प्रॉपर्टी डीलर रामशंकर की हत्या की जांच सीबीआई को सौंप दी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद देहरादून की सीबीआई शाखा में 6 मई को मुकदमा दर्ज किया गया। रामशंकर की पत्नी ने खानपुर कोतवाली पुलिस पर केस में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार की न तो फॉरेंसिक जांच करवाई और न कार मालिक से पूछताछ की।
याचिकाकर्ता चंद्रलेखा निवासी कुडकावाला, डोईवाला ने बताया कि, उनके ससुर रमेश चंद्र ने अपने बेटे रामशंकर के लापता होने की रिपोर्ट 8 दिसंबर को खानपुर कोतवाली में दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के आधार पर 13 दिसंबर 2024 को राबिन नामक व्यक्ति की निशानदेही पर शव बरामद किया। इस मामले में 13 दिसंबर 2024 को खानपुर कोतवाली में राबिन, अक्षय और अंकित तीनों निवासी निवासी चंदपुरी खादर खानपुर, हरिद्वार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। चंद्रलेखा का आरोप है कि पुलिस ने जांच में लापरवाही की। हत्या में जिस कार का इस्तेमाल किया गया, उसके पहले मालिक अनिल कुमार और दूसरे मालिक सोनू फौजी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही कार की फॉरेंसिक जांच भी नहीं की गई। पुलिस ने जल्दबाजी में अवधि से पहले ही कोर्ट में आरोपपत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अटॉर्नी जनरल की ओर से प्रस्तुत दलीलें मात्र इस आधार पर स्वीकार नहीं की जा सकती कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है, जिसकी अभी तक प्रतीक्षा की जा रही है, जबकि मुकदमा शुरू हो चुका है। यदि यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि स्थानीय पुलिस की ओर से जांच में कोई चूक हुई है, तो मुकदमा शुरू होने के बावजूद भी, यह न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मामले को आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंप सकता है। ऐसे में याचिका स्वीकार की जाती है और प्रथम सूचना (एफआईआर) के मामले की आगे की जांच के लिए इसे तत्काल सीबीआई को हस्तांतरित (ट्रांसफर) किया जाता है। स्थानीय जांच एजेंसी को निर्देश दिया जाता है कि वह जांच के दौरान प्राप्त पूरे रिकार्ड, जिसमें आरोप पत्र भी शामिल है, सीबीआई को तत्काल सौंप दें।





