उत्तराखंड

नौकरी बेचने वाले युवाओं के भविष्य की बात पर कर रहे न्याय यात्रा का आडंबरः चौहान

देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस की प्रस्तावित न्याय यात्रा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दूसरों से न्याय का हिसाब मांगने निकली कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल और अपने नेताओं के विवादित फैसलों का हिसाब जनता को देना चाहिए। जिस पार्टी के शासनकाल में नौकरियों को लेकर खर्चा-पर्चा और राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर मामले सामने आये वह आज किस मुंह से न्याय की बात कर रही है? कांग्रेस को न्याय यात्रा निकालने से पहले उत्तराखंड के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, जिनके भविष्य और रोजगार की व्यवस्था को लेकर उसकी सरकार पर सवाल उठते रहे हैं।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने है। सत्ता में रहते हुए जवाबदेही से बचना और विपक्ष में आते ही जनहित के मुद्दों पर यात्रा निकालना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। कांग्रेस बताए कि उसके शासनकाल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की जिम्मेदारी कौन लेगा? युवाओं को रोजगार देने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाली पार्टी अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने से क्यों बचती है? युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय के सवालों का जवाब दिए बिना कांग्रेस न्याय की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं रखती।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को भी उन मुद्दों पर जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए, जिनको लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस होती रही है। प्रदेश मे भर्ती घोटालों से जनता भली भाँति वाक़िफ़ है। नौकरियां कैसे बेची गयी कांग्रेस के कारनामे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना से जुड़ा विवाद हो या सरकारी कर्मचारियों के लिए जुमे की छुट्टी को लेकर हुई राजनीतिक चर्चाकृकांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि इन मुद्दों पर उसका वास्तविक रुख क्या है। देवभूमि की धार्मिक आस्था, सामाजिक संवेदनशीलता और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर कांग्रेस को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस को जनता के बीच न्याय का संदेश देने से पहले यह भी बताना चाहिए कि उसके नेताओं से जुड़े इन विवादों पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष क्या है। जब जनता के मन में सवाल हों, तो कांग्रेस को राजनीतिक चुप्पी या बहानेबाजी के बजाय स्पष्ट जवाब देना चाहिए। यदि कांग्रेस खुद को जनभावनाओं का सम्मान करने वाली पार्टी बताती है, तो उसे जनता की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जहां गलती हुई हो, वहां माफी मांगने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने वर्ष 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में सामने आए स्टिंग ऑपरेशन ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यशैली, सत्ता की खींचतान और राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उत्तराखंड की जनता यह जानना चाहती है कि उस समय प्रदेश के हितों से ज्यादा सत्ता की राजनीति क्यों हावी रही। आज न्याय की दुहाई देने वाली कांग्रेस को अपने अतीत के सवालों से मुंह मोड़ने के बजाय उनका जवाब देना चाहिए। प्रदेश की जनता राजनीतिक घटनाक्रमों को भूलने वाली नहीं है और न ही केवल नारों के आधार पर किसी पार्टी पर भरोसा करने वाली है।
चौहान ने कहा कि बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल में किए गए कामों का हिसाब देना चाहिए। वह बताए कि युवाओं को रोजगार देने, भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए उसने कौन-से ठोस कदम उठाए। केवल सरकार को घेरने से समस्याओं का समाधान नहीं होता। जनता को आरोपों की सूची नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान और जवाबदेही चाहिए। चौहान ने कहा कि भ्रष्टाचार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण भी प्रस्तुत करने चाहिए। लोकतंत्र में सवाल उठाना अधिकार है, लेकिन बिना ठोस आधार के आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाना जिम्मेदार विपक्ष की पहचान नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता को राजनीतिक यात्राओं और भाषणों से अधिक रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, पलायन का समाधान और पारदर्शी व्यवस्था चाहिए। कांग्रेस को यह बताना होगा कि उसके पास इन समस्याओं के समाधान का क्या रोडमैप है और वह अपने अतीत से जुड़े सवालों पर जवाबदेही कब स्वीकार करेगी।

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