उत्तराखंड

त्रियुगीनारायण पहुंचे 3.58 लाख से अधिक तीर्थयात्री

रुद्रप्रयाग। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण धाम में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष अब तक 3 लाख 58 हजार 663 से अधिक तीर्थयात्री यहां पहुंच चुके हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या से क्षेत्र में तीर्थाटन एवं पर्यटन कारोबार को नई गति मिल रही है। वहीं, आगामी दिनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने के साथ ही यहां पर्यटकों और विवाह समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है।
त्रियुगीनारायण धाम अपनी धार्मिक मान्यता, पौराणिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वर्षभर यहां देश के विभिन्न राज्यों से तीर्थयात्रियों का आवागमन जारी रहता है। बीते कुछ समय से यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि का सकारात्मक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होटल, होम स्टे, रेस्टोरेंट, ढाबा, टैक्सी और वाहन संचालकों सहित छोटे कारोबारियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
विशेष रूप से शादी-विवाह के लिए त्रियुगीनारायण पहुंचने वाले जोड़ों और उनके परिजनों की बढ़ती रुचि ने स्थानीय पर्यटन व्यवसाय के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। आने वाले शादी के सीजन में विवाह समारोहों के आयोजन के लिए यहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ने से होटल एवं होम स्टे व्यवसाय, खानपान और परिवहन सेवाओं में तेजी आने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
त्रियुगीनारायण मंदिर के प्रबंधक बलवीर सिंह नेगी ने बताया कि इस वर्ष अब तक धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 3 लाख 58 हजार 663 के पार पहुंच चुकी है। आगामी दिनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने से यहां आने वाले लोगों की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से क्षेत्र के तीर्थाटन एवं पर्यटन व्यवसाय को मजबूती मिल रही है।
इधर, स्थानीय व्यापारियों को भी आगामी शादी के सीजन से बेहतर कारोबार की उम्मीद है। व्यापारियों का मानना है कि यदि यात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही इसी तरह बनी रहती है तो क्षेत्र के होटल, होम स्टे, खानपान, परिवहन और बाजार से जुड़े कारोबार में तेजी आएगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ ही क्षेत्र के युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही आजीविका के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

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