पावर सेंटर बना गदरपुर में विधायक अरविंद पांडे का आवास

रुद्रपुर। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही हैं। खासकर गदरपुर विधानसभा क्षेत्र इन दिनों प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के आवास पर लगातार भाजपा के बड़े नेताओं की आवाजाही ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जिनसे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं भाजपा के भीतर भी बैठकों और राजनीतिक समीकरणों का दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है। गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों हो रही राजनीतिक गतिविधियां इसी ओर इशारा कर रही हैं।
दरअसल, गदरपुर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के आवास पर पिछले कुछ दिनों से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की लगातार आवाजाही देखी जा रही है। बीते दिन पौड़ी गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी उनके आवास पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि इस मुलाकात को लेकर किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अरविंद पांडे के आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लंबी मुलाकात हुई, जिसके बाद गदरपुर सहित पूरे प्रदेश में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन और रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की लगातार बैठकों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी में सब कुछ सामान्य होने की बात कही और किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों को सिरे से खारिज किया, लेकिन जिस तरह से लगातार बड़े नेताओं की बैठकें हो रही हैं, उससे राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म बना हुआ है।
बता दें कि विधायक अरविंद पांडे पिछले दो वर्षों में कई विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं,। कभी जमीन विवाद, तो कभी भू-माफिया से जुड़े आरोपों के चलते उनका नाम सुर्खियों में रहा। इतना ही नहीं, उनके बेटे पर लगे आरोपों और आवास पर सरकारी जमीन कब्जाने के मामलों ने भी विपक्ष को भाजपा पर निशाना साधने का मौका दिया था। अब ऐसे समय में भाजपा के बड़े नेताओं का लगातार अरविंद पांडे के आवास पहुंचना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। हालांकि इन बैठकों के पीछे की असली वजह क्या है, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा। लेकिन इतना तय है कि 2027 चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है।





