उत्तराखंडबड़ी खबर

धामी कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केन्द्र पोषित योजना (सी०एस०एस०) के अन्तर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार को स्वीकृत किया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार को वर्ष 2024-25 से एम०बी०बी०एस० कक्षायें संचालित किये जाने हेतु शासन स्तर से अनिवार्यता प्रमाण पत्र निर्गत किया जा चुका है। उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में ऐसे विद्यालय का चयन किया जाएगा जिसके 15 कि0मी की परिधि में अधिक से अधिक राजकीय हाईस्कूल एवं राजकीय इण्टर कालेज संचालित हों। कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी सचिव मुख्यमंत्री शैलैश बगोली द्वारा पत्रकारों को दी गई।

राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में 100 एम०बी०बी०एस० प्रशिक्षु क्षमता के संचालन हेतु आवश्यक पदों के सृजन के संबंध में। उत्तराखण्ड एक पर्वतीय एवं विषम भौगोलिक स्थितियों वाला राज्य है। प्रदेश के पर्वतीय, दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में भी जनसामान्य के लिए विशेषीकृत चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध नहीं है। भारत सरकार द्वारा 90ः10 के अनुपात में केन्द्र पोषित योजना (सी०एस०एस०) के अन्तर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार को स्वीकृत किया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार को वर्ष 2024-25 से एम०बी०बी०एस० कक्षायें संचालित किये जाने हेतु शासन स्तर से अनिवार्यता प्रमाण पत्र निर्गत किया जा चुका है। अतः एन०एम०सी० से एम०बी०बी०एस० कक्षायें संचालित किये जाने हेतु अनुमति प्राप्त किये जाने के संबंध में उक्त नवीन स्वीकृत मेडिकल कॉलेज के त्वरित संचालन, अन्य व्यवस्थाओं एवं पर्यवेक्षण आदि किये जाने हेतु ढांचा सृजित किया गया है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़ में 100 एम०बी०बी०एस० प्रशिक्षु क्षमता के संचालन हेतु आवश्यक पदों के सृजन के संबंध में। उत्तराखण्ड एक पर्वतीय एवं विषम भौगोलिक स्थितियों वाला राज्य है। प्रदेश को पर्वतीय, दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में भी जनसामान्य के लिए विशेषीकृत चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध नहीं है। भारत सरकार द्वारा 90ः10 के अनुपात में केन्द्र पोषित योजना (सी०एस०एस०) के अन्तर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़ को रवीकृत किया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़ को आगामी शैक्षणिक सत्र हेतु अनिवार्यता प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने की कार्यवाही गतिमान है। अतः एन०एम०सी० से एम०बी०बी०एस० कक्षायें संचालित किये जाने हेतु अनुमति प्राप्त किये जाने के संबंध में उक्त नयीन रवीकृत मेडिकल कॉलेज के त्वरित संचालन, अन्य व्यवरथाओं एवं पर्यवेक्षण आदि किये जाने हेतु ढांचा सृजित किया गया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राजकीय हाईस्कूल एवं राजकीय इण्टर कालेजों में शिक्षकों के लम्बे अवकाश की स्थिति में छात्रहित में अस्थाई शिक्षकों को प्रतिवादन की दर से मानदेय पर कार्ययोजित किए जाने के सम्बन्ध में। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत शिक्षकों के रिक्त पदों के अतिरिक्त दीर्घावकाश यथा चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश एवं बाल्य देखभाल अवकाश आदि के फलस्वरूप प्रदेश में हर समय लगभग 1500-2000 शिक्षक 15 दिन से 06 माह की अवधि तक अवकाश पर रहने के कारण छात्र-छात्राओं का शिक्षण कार्य प्रभावित होता है एवं शैक्षिक गुणवत्ता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उपरोक्त कठिनाई के दृष्टिगत सहायक अध्यापक एल०टी० तथा प्रवक्ता संवर्ग के महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक / शिक्षिकाओं के कम से कम एक माह के दीर्घ अवकाश की स्थिति में सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा विज्ञप्ति प्रकाशित की जायेगी। निर्धारित शैक्षिक एवं प्रशिक्षण अर्हता रखने वाले अभ्यथी को मैरिट के आधार पर सहायक अध्यापक एल०टी० के विषयों हेतु रू0 200.00 (दो सौ) एवं प्रवक्त्ता के विषय हेतु 250.00 (दो सौ पचास) प्रतिवादन की दर से मानदेय पर शिक्षण कार्य हेतु तात्कालिक / नितान्त अस्थायी व्यवस्था पर सम्बन्धित खण्ड शिक्षा अधिकारी से अनुमोदनोपरान्त कार्ययोजित किया जायेगा। विद्यालय के सेवित क्षेत्र के निकटस्थ निर्धारित योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी को वरीयता प्रदान की जायेगी। उक्त योजना प्रदेश हित में लागू किए जाने का निर्णय मा० मंत्रिमण्डल द्वारा लिया गया है।

उत्तर प्रदेश के समय से तैनात आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों की तदर्थ सेवाओं को अर्हकारी सेवा के रूप में आगणित करते हुए पेंशन एवं सेवानिवृत्तिक लाभ अनुमन्य कराये जाने के सम्बन्ध में। दिनांक-01 अक्टूबर, 2005 से पूर्व तदर्थ रूप से नियुक्त राज्य सरकार के अन्तर्गत आयुष विभाग के चिकित्सक एवं अन्य कार्मिक तथा राज्य सरकार के अन्य राजकीय विभागों में कार्यरत समस्त कार्मिक, जो दिनाक 01 अक्टूबर, 2005 के उपरान्त विनियमित किये गये हों या जिनका विनियमितीकरण आदेश निर्गत करने से पूर्व निधन हो गया हो, अथवा सेवानिवृत्त हो गये हों तथा जो उत्तराखण्ड विनियमितीकरण नियमावली, 2002 के सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दिनांक 01 अक्टूबर, 2005 से पूर्व विनियमितीकरण की अर्हता रखते हों, एवं तत्समय नियमित पद रिक्त हो, के सम्बन्ध में कार्यवाही की जानी प्रस्तावित है।

Related Articles

Back to top button