बदरी-केदार मंदिर समिति में सीईओ पद की जिम्मेदारी के रुद्रप्रयाग डीएम को सौंपी गई

देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 से ठीक पहले एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सीईओ पद पर लंबे समय से रिक्तता थी। बीकेटीसी के पूर्व सीईओ विजय थपलियाल की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद यह पद खाली पड़ा हुआ था। अब प्रदेश सरकार ने इस महत्वपूर्ण पद पर रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
19 अप्रैल 2026 से चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। ऐसे में यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सीईओ पद की रिक्तता भरी जाना जरूरी था। रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के पास अब बीकेटीसी की समूची जिम्मेदारी अतिरिक्त रूप से होगी।
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे बड़ी धार्मिक और आर्थिक गतिविधि है। हर साल लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में दर्शन करने आते हैं। बीकेटीसी विशेष रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों का प्रबंधन संभालती है। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क-रोड की स्थिति, आवास और प्रसाद व्यवस्था जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं।
विजय थपलियाल के जाने के बाद पद खाली रहने से कई काम प्रभावित हो रहे थे। प्रदेश सरकार ने इस रिक्तता को भरने के लिए तेजी से कवायद शुरू की थी। कई पीसीएस अधिकारी इस पद के लिए सिफारिश भी कर रहे थे। लेकिन अंत में सरकार ने रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देकर एक मजबूत और अनुभवी प्रशासक को जिम्मेदारी सौंपी है। रुद्रप्रयाग जिला स्वयं चारधाम क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए डीएम को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, मौसम और स्थानीय चुनौतियों का पूरा ज्ञान है।
देश के प्रमुख मंदिरों में प्रशासनिक पदों पर आईएएस अधिकारियों को तैनात करने का रुझान बढ़ रहा है। महाकाल मंदिर उज्जैन, वैष्णो देवी मंदिर कटरा, तिरुपति बालाजी और सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में भी आईएएस अधिकारी मुख्य पद संभालते हैं। इसी तर्ज पर उत्तराखंड सरकार ने इस बार बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ पद पर भी मजबूत प्रशासनिक अधिकारी को प्राथमिकता दी है।
रुद्रप्रयाग डीएम को अतिरिक्त प्रभार मिलने से अब बीकेटीसी में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर परिसर की सफाई, ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम, हेलीपैड और पैदल मार्ग की व्यवस्था पर सीधा फोकस रहेगा। सरकार का मानना है कि यह फैसला यात्रा को और सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। 19 अप्रैल 2026 से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। केदारनाथ धाम 22 अप्रैल को और बदरीनाथ धाम 23 अप्रैल को कपाट खुलेंगे। पिछले सालों की तरह इस बार भी भारी भीड़ की उम्मीद है। रुद्रप्रयाग डीएम के अतिरिक्त प्रभार से अब बदरी-केदार क्षेत्र में समन्वय और बेहतर होगा। डीएम को अब मंदिर समिति की दैनिक गतिविधियों, बजट, स्टाफ प्रबंधन और श्रद्धालु शिकायतों का भी ध्यान रखना होगा। साथ ही जिला प्रशासन के मौजूदा कामों के साथ यह अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी होगी। यह फैसला दिखाता है कि सरकार चारधाम यात्रा को किसी भी तरह की कमी नहीं आने देना चाहती।
प्रदेश सरकार ने लंबे समय से बीकेटीसी सीईओ पद पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया चला रखी थी। कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले तत्काल फैसला लेना जरूरी था। रुद्रप्रयाग डीएम को अतिरिक्त प्रभार देकर सरकार ने दोनों मंदिरों के प्रबंधन को मजबूत कर दिया है। यात्रियों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि अब एक ही अधिकारी जिला और मंदिर समिति दोनों का समन्वय करेगा। इससे सड़क ब्लॉकेज, मौसम संबंधी सूचना, स्वास्थ्य कैंप और आपात स्थिति में तेज प्रतिक्रिया मिल सकेगी। आने वाले दिनों में बीकेटीसी की वेबसाइट, ऑनलाइन दर्शन बुकिंग और श्रद्धालु सुविधाओं में भी सुधार की उम्मीद है।





