उत्तराखंड

दूरस्थ क्षेत्रों की 51 मेधावी छात्राओं को मिली स्कॉलरशिप

देहरादून। विद्या ज्योति स्कॉलरशिप के तहत राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत स्नातकोत्तर की दूरस्थ क्षेत्रों की 51 छात्राओं को ऋषि मिशन खोसला स्कॉलरशिप के अंतर्गत 35-35 हजार की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत एवं विधायक धर्मपुर विनोद चमोली ने विभिन्न महाविद्यालयों से आयी छात्राओं शालिनी रौतेला, शिवांगी, साक्षी बेंजवाल, अपर्णा रावत, सिमरन रावत, हिमांशी तिवारी, गीतांजली मेलकानी एवं माधुरी को छात्रवृत्ति के चैक सौंपे। इसके अलावा संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित 163 छात्र-छात्राओं को मुख्य परीक्षा में बेहतर कोचिंग हेतु 50-50 हजार की पुरस्कार राशि प्रदान की गई, साथ ही एनडीए, सीडीएस, ओटीए, आईएनए, आईएएफ के माध्यम से चयनित 148 छात्र-छात्राओं को 50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
उच्च शिक्षा विभाग ने आज दो बड़े संस्थानों रूट्स टू रूट्स नई दिल्ली एवं यूपीईएस देहरादून के साथ एमओयू साइन किये। विभाग ने कला संस्कृति एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स तथा भारतीय ज्ञान के क्षेत्र में सहयोग हेतु रूट्स टू रूट्स नई दिल्ली के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जबकि यूपीईएस देहरादून के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित कौशल विकास पाठ्यक्रमों को एनईपी-2020 के अनुरूप राजकीय महाविद्यालयों में संचालित करने को लेकर अनुबंध किया गया। विभागीय मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट का लोकार्पण किया। डॉ0 रावत ने बताया कि नवीन वेबसाइट एनईपी-2020 के अनुरूप अपेडट की गई है, ताकि विभाग से जुड़ी सभी जानकारियां छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं विभागीय कार्मिकों को एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके।
कार्यशाला में स्मार्ट क्लास डिवाइस के-यान को लेकर आईएल एंड एफएस कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपना प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि के-यान एक नॉलेज डिवाइस है जिसे आईआईटी मुम्बई के साथ मिलकर बनाया गया। के-यान एक पोर्टेबल स्मार्ट क्लास साल्यूशन है। जिसमें हाईएंड कम्प्यूटर सिस्टम, प्रोजेक्शन सिस्टम, हाई क्वालिटी ऑडिया-वीडियो स्टिस्म, वर्चुअल इंट्रेक्टिव फीचर सहित इन बिल्ट कैमरा है जो किसी भी क्लास रूम को स्मार्ट क्लास रूम बना सकता है। उन्होंने बताया कि इसमें राज्य के पाठ्यक्रमों का पूरा कंटेंट हैं जो ऑडियो-वीडियो माध्यम में उपलब्ध है। अध्यापकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों के लिये यह डिवाइस छात्र-छात्राओं के लिये उपयोगी साबित होगी। यह आसान तरीके के मुश्किल विषयों को समझाने की क्षमता रखता है। इसमें टीचर ट्रैकिंग सिस्टम भी लगा हुआ है ताकि यह पता लगाया जा सकता है कि किस शिक्षक ने कितना पढ़ाया। इस डिवाइस को अब तक देशभर के 70 हजार स्कूलों में लगाया जा चुका है। के-यान स्कूलों के अलावा कम्युनिटी अवेयरनेस कार्यक्रमों में भी उपयोग में लाया जा सकता है।

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