उत्तराखंड
क्रीड़ा विश्वविद्यालय प्रदेश के खेल क्षेत्र में निर्णायक बदलाव का आधार बनेगाः धामी

हल्द्वानी। उत्तराखंड को देश की प्रमुख खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। राष्ट्रीय खेल दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय एवं मानसखंड खेल परिसर के प्रथम चरण के 43.50 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत भी हुई। सरकार ने साफ कर दिया कि अब लक्ष्य सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना नहीं, बल्कि 2036 के ओलंपिक में उत्तराखंड की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना है।
मेजर ध्यानचंद की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों तथा प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खेल छात्रवृत्ति भी दी गई। धामी ने कहा कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय प्रदेश के खेल क्षेत्र में निर्णायक बदलाव का आधार बनेगा। अभी तक उच्च स्तरीय खेल शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें प्रदेश में ही आधुनिक प्रशिक्षण और खेल शिक्षा की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को ‘खेलभूमि’ के रूप में नई पहचान दिलाना है।
सरकार ने वर्ष 2027 में होने वाले राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के पदकों की संख्या बढ़ाने और ओलंपिक-2036 के लिए अभी से खिलाड़ियों की तैयारी का रोडमैप बनाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को छोटी उम्र से पहचानने, वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और 14 से 23 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है। खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए भी सहायता दी जा रही है। खेल चोट और आकस्मिक परिस्थितियों में बीमा एवं आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।
हर जिले की होगी अपनी खेल पहचान
सरकार ने ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के जरिए हर जिले की अलग खेल पहचान विकसित करने की तैयारी की है। प्रदेश में विभिन्न खेल विधाओं के लिए 23 नई हाईटेक खेल अकादमियां स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। लोहाघाट में प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज पहले ही संचालित किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था का भी असर दिखने लगा है। सरकार के अनुसार अब तक 29 पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को भी सरकारी विभागों में नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
एआई से परखी जाएगी खिलाड़ियों की फिटनेस
खेलों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है। इसके जरिए उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से खिलाड़ियों की कमियों की पहचान कर उनके प्रशिक्षण और प्रदर्शन में सुधार किया जा सकेगा।
खेल प्रतिभाओं को पुरस्कार, खिलाड़ियों का सम्मान
राष्ट्रीय खेल दिवस पर वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न और लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया। वर्ष 2025 के लिए शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न, क्याकिंग एवं कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य तथा बॉक्सिंग के मुकेश चंद्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार मिला। दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से मैदान में पूरी मेहनत और समर्पण के साथ उतरने का आह्वान करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी किसी प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। राष्ट्रीय खेल दिवस पर क्रीड़ा विश्वविद्यालय की नींव रखकर सरकार ने उत्तराखंड के खेल भविष्य को 2027 के राष्ट्रीय खेलों से आगे 2036 के ओलंपिक तक ले जाने का लक्ष्य सामने रखा है।





